सिनान पाशा मस्जिद प्रिज़्रेन के ऐतिहासिक केंद्र के शादरवन इलाके में स्थित एक सक्रिय इबादतगाह है। ओटोमन दौर का यह ऐतिहासिक स्थल 1615 का है और होटल ओके से लगभग 5.6 किमी दूर है।
- स्थान: Sheshi i Shatërvanit, डाक कोड 20000, शादरवन इलाके में।
- ऐतिहासिक संदर्भ: कोसोवो की सांस्कृतिक विरासत सूची में मस्जिद का निर्माणकाल 1615 दर्ज है।
- प्रवेश: यह अब भी एक सक्रिय इबादतगाह है; इबादत के लिए न आने वाले आगंतुकों के आधिकारिक प्रवेश समय उपलब्ध नहीं हैं।
- पास की खासियत: मस्जिद की सीढ़ियों के पास नक्काशीदार पत्थर का एक फव्वारा है।
प्रिज़्रेन में सिनान पाशा मस्जिद कहाँ है?

सिनान पाशा मस्जिद प्रिज़्रेन के ऐतिहासिक केंद्र के शादरवन इलाके में Sheshi i Shatërvanit पर है। ऐतिहासिक इलाके में इसकी जगह इसे केंद्र घूमते समय देखने लायक एक स्वाभाविक पड़ाव बनाती है; प्रिज़्रेन के ऐतिहासिक केंद्र की एक दिन की यात्रा-योजना आपको इसे आसपास के दूसरे प्रमुख स्थलों के साथ अपनी योजना में शामिल करने में मदद कर सकती है।
शहर की पर्यटन वेबसाइट के मुताबिक, शादरवन फव्वारा मस्जिद के पास है। मस्जिद की सीढ़ियों के बगल में, प्रवेश-द्वार की दाईं ओर नक्काशीदार पत्थर का एक फव्वारा है। इसका इस्तेमाल वुज़ू करने और पीने के पानी के लिए किया जाता है।
इस मस्जिद की वास्तुकला की खासियत क्या है?

इस मस्जिद में विशिष्ट बनावट के साथ ओटोमन दौर का पत्थर का काम और चित्रित सजावट देखने को मिलती है। कोसोवो की सांस्कृतिक विरासत सूची इसे 17वीं सदी का वास्तु स्मारक बताती है और सोफ़ी सिनान पाशा को इसका संरक्षक मानती है।
इमारत ऊँची नींव पर बनी है और उत्तर दिशा से नक्काशीदार पत्थर की सीढ़ियों के ज़रिये यहाँ पहुँचा जाता है। इसका आयताकार नक्शा है और दक्षिण-पूर्वी तरफ़ एक आला है। सूची के मुताबिक, यह बनावट कोसोवो की दूसरी मस्जिदों से अलग है। इमारत चूने के गारे से जोड़े गए तराशे हुए नदी के पत्थरों से बनी है, जबकि बाहरी सतह पर तराशे हुए पत्थर लगे हैं। सूची के अनुसार, माना जाता है कि ये पत्थर आर्कएंजल्स मठ के खंडहरों से लाए गए थे।
शहर की पर्यटन वेबसाइट के मुताबिक, अंदर का हिस्सा एक खुला, एकीकृत स्थान है, जिसके ऊपर फूलों और ज्यामितीय आकृतियों वाले चित्रों से सजा गुंबद है। इसकी सजावट तीन चरणों में हुई। पहले दो चरण 16वीं–17वीं सदी के हैं; तीसरा चरण 20वीं सदी का है, जिसमें नीले रंग की आकृतियों वाली बारोक शैली दिखती है।
इस मस्जिद का इतिहास क्या है?

मस्जिद के इतिहास में इसके इस्तेमाल में बदलाव, नुकसान और बहाली के कई दौर शामिल हैं। 1912 तक यहाँ धार्मिक गतिविधियाँ होती थीं; इसके बाद बाल्कन युद्धों और प्रथम विश्व युद्ध के दौरान बुल्गारियाई और सर्बियाई सेनाओं ने इसका इस्तेमाल गोला-बारूद रखने के लिए किया। 1919 में इमारत को भारी नुकसान पहुँचा और इसका बरामदा भी ढहा दिया गया।
1968–1969 में मरम्मत के बाद इसे प्राच्य अभिलेखों का संग्रहालय बनाया गया। 1973 से 1978 के बीच भित्ति-चित्रों की और बहाली व संरक्षण किया गया। 2007 से 2011 तक तुर्की सहयोग और विकास एजेंसी (TIKA) के अनुदान से अंदरूनी और बाहरी हिस्सों की बहाली व संरक्षण का काम हुआ। 2011 में मस्जिद फिर से इबादत के लिए खुली। 2013 में TIKA के एक और अनुदान से इसके दक्षिणी आँगन को व्यवस्थित करने का काम हुआ, जिसमें मनोरंजन के लिए जगहें भी बनाई गईं।
जाने से पहले आपको क्या जानना चाहिए?

सिनान पाशा मस्जिद एक सक्रिय इबादतगाह है, इसलिए अपनी यात्रा की योजना इसी बात को ध्यान में रखकर बनाएँ। इबादत के लिए न आने वाले आगंतुकों के आधिकारिक प्रवेश समय और पहनावे, फ़ोटोग्राफ़ी या नमाज़ के दौरान व्यवहार से जुड़े आधिकारिक निर्देश उपलब्ध नहीं हैं। जाने से पहले ताज़ा जानकारी के लिए आधिकारिक वेबसाइट देखें।
विरासत सूची में मस्जिद को स्थायी संरक्षण के तहत दर्ज किया गया है; तारीख 1599/48 दी गई है। इसमें 2014–2015 के लिए अस्थायी संरक्षण भी दर्ज है।
आस-पास और क्या देख सकते हैं?
यह मस्जिद प्रिज़्रेन के ऐतिहासिक क्षेत्र में है और पास ही शादरवन फव्वारा है। प्रिज़्रेन का पुराना पत्थर का पुल Ura e Gurit भी ऐतिहासिक केंद्र का एक और स्थल है, जिसे आप अपनी योजना में शामिल कर सकते हैं; Ura e Gurit और उसके इतिहास की गाइड में इस ऐतिहासिक स्थल की जानकारी दी गई है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सिनान पाशा मस्जिद कब बनी थी?
कोसोवो की सांस्कृतिक विरासत सूची में मस्जिद का निर्माणकाल 1615 दर्ज है और सोफ़ी सिनान पाशा को इसका संरक्षक बताया गया है।
क्या इबादत के लिए न आने वाले आगंतुक अंदर जा सकते हैं?
मस्जिद में इबादत होती है, लेकिन इबादत के लिए न आने वाले आगंतुकों के आधिकारिक प्रवेश समय उपलब्ध नहीं हैं। जाने से पहले आधिकारिक वेबसाइट देखें।
मस्जिद के गुंबद पर कैसी सजावट है?
गुंबद पर फूलों और ज्यामितीय आकृतियों वाले चित्र तीन चरणों में बनाए गए हैं। इनमें 20वीं सदी का एक चरण भी शामिल है, जिसमें बारोक शैली की नीली आकृतियाँ हैं।
क्या मस्जिद के पास कोई फव्वारा है?
हाँ। सीढ़ियों के पास, प्रवेश-द्वार की दाईं ओर नक्काशीदार पत्थर का एक फव्वारा है। इसका इस्तेमाल वुज़ू करने और पीने के पानी के लिए किया जाता है।
